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रिटायरमेंट पर नहीं मिला सहायक शिक्षक (एल.बी) को पेंशन और ग्रेच्युटी तो हाईकोर्ट में दायर की याचिका, यह एक आदेश पड़ रहा शिक्षकों को अब बहुत भारी

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बिलासपुर। सेवानिवृत सहायक शिक्षक को प्रथम नियुक्ति तिथि से पेंशन एवं उपादान नहीं दिये जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने दो सप्ताह बाद अगली सुनवाई निर्धारित की है । तारेंन्द्र सिंह चौहान सेवानिवृत्त सहायक शिक्षक (एलबी) रायपुर शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के पद पर 2005 में नियुक्ति हुई थी । तीन वर्ष की सेवा के बाद इन्हें स्थायी किया गया था एवं नियमित सेवा करने के उपरांत 1 जुलाई 2018 को शासन के निर्देशानुसार सहायक शिक्षक (एल० बी०) के पद पर संविलयन किया गया था। सहायक शिक्षक (एल० बी०) के पद पर रहते हुए दिनांक 30 जुन 2022 को 62 वर्ष आयु पूर्ण होने पर शासकीय सेवा से सेवा निवृत्त किया गया। सेवानिवृत्त होने के बाद चौहान को प्रथम नियुक्ति से पेंशन एवं उपादान नहीं दिया गया । संविलयन दिनांक 2018 से सेवा अवधि मानते हुए पेंशन एवं उपादान प्रदान किया जा रहा था, इससे क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ता नसीमुद्दीन अंसारी के माध्यम से एक याचिका प्रस्तुत की। इसमे अपनी प्रथम नियुक्ति 2005 से सेवा अवधि मान्य करते हुए पेंशन एवं उपादान दिलाए जाने के लिए उच्च न्यायालय से गुहार लगाई। उच्व न्यायालय ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का सम्पूर्ण तथ्यसुनने के बाद आगामी सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है ।

संविलियन निर्देश बन रहा मार्ग में बाधक

दरअसल प्रदेश में जब शिक्षाकर्मियों का शिक्षक के पद पर संविलियन किया गया तो 30 जून 2018 को ही जारी संविलियन निर्देश 1 के क्रमांक 4 में शासन ने इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख कर दिया था कि शिक्षक (एलबी) संवर्ग को देय समस्त लाभ के लिए सेवा की गणना संविलियन दिनांक से की जाएगी और इसी आदेश के चलते न तो शिक्षकों को पूर्ण पेंशन का लाभ मिल पा रहा है , न ग्रेच्युटी का और न ही अवकाश नगदीकरण का , न्यायालय में शासकीय वकील इसी आदेश को सामने रखकर यह प्रमाणित कर देते हैं कि इन शर्तों के आधार पर ही शासन ने संविलियन दिया है । इससे पहले भी इस प्रकार की याचिकाएं लगी है और सभी में शिक्षको को हार का सामना करना पड़ा है अब देखना होगा की इस याचिका में फैसला बदलता है या फिर एक बार वही फैसला देखने को मिलेगा ।

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