जेल से रिहा हुए बेटे को लेने खुद कार चलाकर पहुंचे भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 170 दिन बाद चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत, रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा, ढोल-नगाड़ों के बीच भूपेश ने किया बेटे का स्वागत
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चैतन्य को करीब 170 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया, जहां बाहर उमड़े कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया।
चैतन्य बघेल की रिहाई के समय रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर उत्सव जैसा माहौल नजर आया, भीड़ इतनी ज्यादा थी कि आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। जेल से बाहर आने के बाद चैतन्य ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया में कहा कि न्यायालय का बहुत-बहुत धन्यवाद, यह मामला न्यायिक समीक्षा के अधीन होने के कारण इस पर ज्यादा बोलना उचित नहीं होगा, साथ ही उन्होंने समर्थकों के प्रति आभार जताया।
रिहाई से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक अंदाज में कहा था कि 18 जुलाई को चैतन्य को उसके जन्मदिन पर गिरफ्तार किया गया था और आज पोते के जन्मदिन पर उसकी रिहाई हो रही है। वे खुद कार चलाकर रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे और बेटे को रिसीव किया, इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘चैतन्य बघेल जिंदाबाद’ के नारे लगाए और पटाखे फोड़कर खुशी मनाई।
शराब घोटाले के इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी करप्शन ब्यूरो/ईओडब्ल्यू (ACB/EOW) ने चैतन्य बघेल पर 2019 से 2022 के बीच चलाए गए कथित शराब सिंडिकेट में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस सिंडिकेट के जरिए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और करीब 3,200 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला किया गया, जिसमें चैतन्य पर लगभग 1,000 करोड़ रुपए के लेन-देन हैंडल करने और 200–250 करोड़ रुपए हिस्से के तौर पर पाने के आरोप हैं।
ED की ओर से अदालत में कहा गया था कि शराब घोटाले से जुड़े पैसों को अलग-अलग माध्यमों से चैनलाइज कर चैतन्य बघेल तक पहुंचाया जाता था और इस नेटवर्क में अनवर ढेबर, दीपेंद्र चावड़ा, केके श्रीवास्तव और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल जैसे नामों का भी जिक्र आया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने तर्क दिया कि चैतन्य की गिरफ्तारी सह-आरोपी पप्पू बंसल के बयान के आधार पर की गई जो न्यायसंगत नहीं है, जबकि पप्पू बंसल के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट होते हुए भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया।
रिजवी का कहना था कि 2022 से चल रही जांच के दौरान चैतन्य को कभी समन नहीं भेजा गया, उनके घर पर हुई रेड में सभी डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज एजेंसी को सौंपे गए और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया, इसके बावजूद सीधे गिरफ्तारी की गई। उनका आरोप है कि कानून को ताक पर रखकर सिर्फ इस वजह से चैतन्य को गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती और पुलिस पर सवाल
शराब घोटाला केस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार न किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया और इसे कानून का गंभीर उल्लंघन बताया। कोर्ट ने राज्य के DGP को निर्देश दिया कि वे मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराए जाने से रोकने के लिए सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष ने बंसल के बयान पर तो भरोसा किया, लेकिन जब वह पुलिस के सामने मौजूद थे और उनके खिलाफ स्थायी वारंट भी जारी था, तब भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने इसे कानून के ‘चुनिंदा इस्तेमाल’ की नीति बताते हुए न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया।
जाने क्या है शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ED और ACB/EOW द्वारा की जा रही है, जिसमें 3,200 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित वित्तीय अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोप हैं। FIR में आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर समेत कई लोगों ने मिलकर एक शराब सिंडिकेट तैयार किया।
जांच के अनुसार घोटाले को A, B और C कैटेगरी में बांटकर अंजाम दिया गया, जिसमें डिस्टिलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन, नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना और सप्लाई जोन में हेरफेर करके अवैध वसूली जैसे तरीके अपनाए गए। ACB को मिले साक्ष्यों के मुताबिक केवल देशी शराब की सप्लाई से ही तीन वित्तीय वर्षों में डिस्टिलरी संचालकों ने 52 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम सिंडिकेट को ‘पार्ट C’ के रूप में दी





