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पेट्रोल डीजल के दाम स्थिर क्यों हुए क्या जनता को मिली असली राहत या सिर्फ अस्थायी सुकून…चेक करें ताजा दाम

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Petrol-Diesel Rate:  30 मई को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल कंपनियों ने पुराने रेट ही जारी रखे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत की सांस मिली है। हालांकि यह राहत कितनी टिकाऊ होगी, इस पर सवाल बने हुए हैं।

पिछले दिनों की बढ़ोतरी ने बिगाड़ा बजट
इससे पहले लगातार कई बार ईंधन के दाम बढ़ चुके हैं। बीते दो हफ्तों में चार बार कीमतें बढ़ने से आम लोगों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ा है। परिवहन और दैनिक खर्च पहले ही महंगे हो चुके हैं, जिससे चिंता और बढ़ गई है।

महानगरों में पेट्रोल के ताजा दाम क्या संकेत दे रहे हैं

दिल्ली
102.12 रुपये प्रति लीटर

मुंबई
111.18 रुपये प्रति लीटर

कोलकाता
113.47 रुपये प्रति लीटर

चेन्नई
107.77 रुपये प्रति लीटर

हैदराबाद
115.69 रुपये प्रति लीटर

इन आंकड़ों से साफ है कि अलग अलग शहरों में ईंधन की कीमतों में बड़ा अंतर बना हुआ है।

डीजल की कीमतें क्यों बनी हुई हैं दबाव में
डीजल की कीमतों में भी कोई राहत नहीं दिख रही है। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और जरूरी सामानों की ढुलाई पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई और अधिक महसूस की जा रही है।

महानगरों में डीजल के ताजा रेट

दिल्ली
95.20 रुपये प्रति लीटर

मुंबई
97.83 रुपये प्रति लीटर

कोलकाता
99.82 रुपये प्रति लीटर

चेन्नई
99.55 रुपये प्रति लीटर

हैदराबाद
103.82 रुपये प्रति लीटर

हर शहर में अलग कीमतें क्यों बन रही हैं बड़ी समस्या
देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम एक समान नहीं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण राज्यों का अलग अलग टैक्स ढांचा और स्थानीय कर हैं। जहां टैक्स अधिक है वहां ईंधन महंगा हो जाता है और जहां कम है वहां कीमतें थोड़ी राहत देती हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार ने क्यों रोकी कीमतों की रफ्तार
हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार स्थिर हुआ है, जिसके चलते घरेलू स्तर पर भी फिलहाल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

आगे क्या फिर बढ़ सकती हैं कीमतें
विशेषज्ञों के अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ती है या कच्चे तेल के दाम ऊपर जाते हैं, तो भारत में भी ईंधन की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। आने वाले दिनों की स्थिति पूरी तरह वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी।

रुपये की कमजोरी क्यों बन सकती है सबसे बड़ा खतरा
भारत अपनी जरूरत का अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी सीधे पेट्रोल और डीजल की कीमतों को प्रभावित करती है। अगर रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है और इसका बोझ आम जनता पर पड़ता है।

TNA DESK

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