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अब शिक्षक करेंगे शौचालयों का सत्यापन …. 119 शिक्षकों की लगी ड्यूटी….. गैर शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों को झोंकने का सिलसिला जारी !

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जिस पेशे को आज से कुछ दशक पहले तक सबसे सम्मान के नजरिए से देखा जाता था आज वह पेशा और उस पेशे से जुड़े हुए लोग यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिरकार उनकी भर्ती हुई है तो हुई किस लिए है क्योंकि कभी उनकी ड्यूटी तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में लगा दिया जाता है तो कभी चेक पोस्ट बैरियर में…. कभी उनकी ड्यूटी घर-घर जाकर सर्वेक्षण कार्य में लगा दी जाती है तो कभी वैक्सीनेशन के कार्य में …. कभी राशन कार्ड सत्यापन में ड्यूटी लगा दी जाती है तो कभी राशन बांटने में अब इन सबसे अतिरिक्त शिक्षकों को एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है और वह है शौचालय सत्यापन की…. सोच कर देखिए जिन गुरुओं को और राष्ट्र निर्माता की उपाधि मिली है उनके लिए प्रशासन द्वारा क्या काम ढूंढा गया है । पंचायत विभाग ने शौचालयों का निर्माण किया और डेटाबेस में एंट्री की , इसकी जांच तीसरे पक्ष से कराई गई और जांच में डाटा में गड़बड़ी पाई गई तो अब उसके सत्यापन के लिए शिक्षकों को झोंक दिया गया है सवाल यह खड़ा होता है कि क्या पंचायत विभाग और अन्य विभाग में कर्मचारी नहीं है और पूरे विभागों को सही करने की जिम्मेदारी केवल और केवल शिक्षकों की है ।

दरअसल कोई भी विभाग शिक्षा विभाग को कभी भी पत्र लिखकर कर्मचारी मांग लेता है और शिक्षा विभाग के अधिकारी तत्काल उन्हें कर्मचारी प्रदत भी कर देते हैं । एक तरफ राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने की वकालत की जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ठेंगा दिखाते हुए शिक्षकों की ड्यूटी ऐसे कार्यों में लगाई जा रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है ।

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