CHHATTISGARHबिलासपुर संभाग

High Court का ऐतिहासिक फैसला : परिवार में पहले से सरकारी नौकरी है? फिर भी मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति…जानें कोर्ट की बड़ी शर्त

खबर को शेयर करें

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि परिवार का कोई अन्य सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत है, तब भी अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल तकनीकी कारणों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता, बल्कि परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करना आवश्यक है.इस फैसले से एक मृत सफाई कर्मचारी के परिवार को बड़ी राहत मिली है.

अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य: केवल नियम नहीं, मानवीय सहारा भी

न्यायालय ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मूल उद्देश्य ऐसे परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता देना है, जिन्होंने अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया है. इसलिए केवल औपचारिक या तकनीकी आधार पर आवेदन को खारिज करना इस योजना की मानवीय भावना के विपरीत है.

पूरा मामला क्या था: नौकरी में रहते मृत्यु के बाद परिवार में विवाद

यह मामला अंबिकापुर नगर निगम में कार्यरत एक सफाई कर्मचारी से जुड़ा है, जिनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी. उनके परिवार में पत्नी, तीन पुत्र और एक पुत्री रह गई.मृतक के पुत्र ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन यह कहकर आवेदन खारिज कर दिया गया कि उसकी माता पहले से ही सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं.इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां एकल पीठ ने नगर निगम के निर्णय को रद्द करते हुए अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया था. इसी आदेश के खिलाफ नगर निगम आयुक्त ने खंडपीठ में अपील दायर की.

इसे भी पढ़े...  छत्तीसगढ़ के स्कूलों में नया सत्र नई पहचान…दो सेट यूनिफॉर्म और बदला हुआ लुक, 16 जून से लागू होगी व्यवस्था

नगर निगम का तर्क और याचिकाकर्ता का पक्ष

सुनवाई के दौरान नगर निगम ने तर्क दिया कि राज्य की 14 जून 2013 की नीति के अनुसार यदि परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती.वहीं याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी माता का वेतन बहुत कम है और उससे परिवार का भरण पोषण संभव नहीं है. साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि आवेदन खारिज करने से पहले परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति की जांच नहीं की गई.

न्यायालय की टिप्पणी: केवल नौकरी होना पर्याप्त आधार नहीं

खंडपीठ ने कहा कि परिवार ने अपना मुख्य कमाने वाला सदस्य खो दिया है और केवल यह तथ्य कि परिवार का कोई सदस्य नौकरी में है, अनुकंपा नियुक्ति से इनकार का पूर्ण आधार नहीं बन सकता.अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कम वेतन वाली नौकरी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत मान लेना उचित नहीं है.

महत्वपूर्ण सिद्धांत: कल्याणकारी योजना का उद्देश्य सर्वोपरि

न्यायालय ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं है, लेकिन यह एक कल्याणकारी और मानवीय योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक संकट में फंसे परिवारों को सहारा देना है.इसलिए अधिकारियों को ऐसे मामलों में केवल नियमों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.

अंतिम निर्णय: नगर निगम की अपील खारिज, राहत बरकरार

इन टिप्पणियों के साथ उच्च न्यायालय ने नगर निगम की अपील खारिज कर दी और एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए परिवार को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने का रास्ता साफ कर दिया.

TNA DESK

TNA DESK में अनुभवी पत्रकारों की टीम है जो देश दुनिया की तमाम खबरों पर पैनी नज़र बनाए रखती है और पाठकों के सामने विश्वसनीयता के साथ हर खबरों का हर पल अपडेट देती है

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button