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CG : मैनपाट कर्मा रिसोर्ट पर सवाल, 21 करोड़ खर्च का ब्यौरा सदन में

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में मैनपाट कर्मा रिसोर्ट को लेकर अहम चर्चा हुई। विधायक रामकुमार टोप्पो ने मैनपाट स्थित कर्मा एथेनिक रिसोर्ट के निर्माण, लागत और रखरखाव से जुड़ी विस्तृत जानकारी सरकार से मांगी।

इस पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने जवाब देते हुए बताया कि यह परियोजना “पहाड़ एवं चट्टान” मद के तहत विकसित की गई है। मैनपाट कर्मा रिसोर्ट करीब 8 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और इसके निर्माण पर 21 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में 25 से अधिक कार्य शामिल थे, जिनमें बुनियादी ढांचा, पर्यटक सुविधाएं, आवास व्यवस्था और सौंदर्यीकरण जैसे विकास कार्य शामिल हैं। इस परियोजना को एक समग्र पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी।

मैनपाट कर्मा रिसोर्ट के रखरखाव पर भी जानकारी दी गई, जिसके अनुसार जनवरी 2026 में करीब 67,630 रुपये मासिक खर्च किए गए। इससे स्पष्ट होता है कि इसके संचालन के लिए नियमित बजट का प्रावधान किया जा रहा है।

हालांकि, सदन में इस बात को लेकर सवाल उठे कि इतनी बड़ी लागत के बावजूद क्या परियोजना से अपेक्षित पर्यटन लाभ मिल रहा है। “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहे जाने वाले मैनपाट में ऐसे प्रोजेक्ट्स की उपयोगिता और आय-व्यय का समय-समय पर मूल्यांकन जरूरी बताया गया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में छातिम वृक्ष विवाद को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने इन पेड़ों के रोपण पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि इससे लोगों में अस्थमा और एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।

उन्होंने सदन में कहा कि नई कॉलोनियों और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष लगाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों को सांस से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने पहले से लगे पेड़ों को हटाने के लिए आवेदन स्वीकृत करने की भी मांग उठाई।

इस पर पर्यावरण मंत्री ओ. पी. चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल छातिम वृक्षों के हानिकारक प्रभाव को लेकर कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि कुछ राज्यों में इस पेड़ पर प्रतिबंध लगाया गया है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी रोपण पर रोक लगाने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं है, लेकिन भविष्य में ऐसे पौधों के रोपण को रोका जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कोनोकार्पस पेड़ के हानिकारक प्रभावों पर वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध है और इस पर प्रतिबंध की दिशा में पहल की जा रही है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की समिति बनाकर गहन जांच कराई जानी चाहिए। मंत्री ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वैज्ञानिकों की टीम बनाकर अध्ययन कराया जाएगा।

चर्चा के दौरान विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि यदि कोई पेड़ इंसानों के लिए खतरा बनता है, तो उसे हटाना जरूरी है। छातिम वृक्ष विवाद को लेकर सरकार ने फिलहाल संतुलित रुख अपनाया है, लेकिन भविष्य में इस पर बड़ा निर्णय संभव है।

TNA DESK

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