मध्यप्रदेश

MP News: CM हेल्पलाइन पर CS की रिपोर्ट, 10 विभागों के अफसरों का डी-कैटेगरी परफॉर्मेंस

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MP News: मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने पिछले दिनों समीक्षा अफसरों की समीक्षा बैठक की थी. कलेक्टर कमिश्नर स्तर के अधिकारी भी बैठक में शामिल थे. जिसके बाद एक और समीक्षा खुद मुख्य सचिव कार्यालय ने की है. सीएम हेल्पलाइन की रिपोर्ट के आधार पर 10 विभागों के बड़े अधिकारियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट डी कैटेगरी की आई है. यह ऐसे विभाग हैं, जिनको लेकर जनता से जुड़े हुए काम अक्सर होते हैं. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में पहुंचने के बाद अफसरों को शिकायतों का निराकरण करना था, लेकिन रवैया यह रहा कि शिकायतें दम तोड़ रही हैं. उनका निराकरण नहीं हुआ है.

मुख्य सचिव कार्यालय के मुताबिक 10 विभागों की समीक्षा पिछले दिनों की गई थी. जनवरी 2026 की समीक्षा बैठक में कई ऐसे विभाग हैं, जो जनता से जुड़े हुए हैं. लेकिन उनमें कारवाई काफी कम हुई है. पंचायत, लोक निर्माण विभाग, पिछड़ा और अल्पसंख्यक, जल संसाधन, जनजाति अनुसूचित जाति कल्याण, राजस्व उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग का रिकॉर्ड डी कैटेगरी के मुताबिक आया है. जानकारी के मुताबिक इन विभागों में 50% से कम और 27 प्रतिशत रहा है. यानी कि शिकायतें विभाग तक पहुंची उनका निराकरण नहीं हुआ. अधिकांश शिकायतों का निराकरण 50 दिन की भीतर भी नहीं हुआ है.

60 दिन बाद भी नहीं हुआ निराकरण

60 दिन बाद भी शिकायत जस की तरफ पड़ी हुई है. खास बात है कि नीचे स्तर से शिकायत का निराकरण न होने पर यह शिकायत प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव तक पहुंचती है. इसके बाद भी अधिकारियों का रवैया है कि जनता की शिकायतों का निराकरण हो ही नहीं रहा है. उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायत पहुंचना यानी मुख्यमंत्री सचिवालय और मुख्यमंत्री के संज्ञान में है. फिर भी जनता से जुड़ी हुई शिकायतों का निराकरण नहीं हो रहा है.

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इन अधिकारियों के विभागों का कामकाज रहा खराब

जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी डॉ राजेश अजोरा का है लेकिन सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों का अंबार लगा हुआ है. हायर एजुकेशन विश्वविद्यालय की समस्या भी जमकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच रही है. इस विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन है. सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला है. यहां पर भी शिकायतों के निराकरण का हिसाब किताब खराब है. कड़क मिजाज महिला अधिकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी के विभाग पंचायत का बेहतर नहीं है. लोक निर्माण विभाग का भी यही हाल है. इसके साथ ही नामांकन सीमांकन बंटवारे और अन्य किसानों की समस्या से जुड़े हुए विभाग राजस्व की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव विवेक कुमार पोरवाल की है. उनके भी विभाग की यही स्थिति है. खराब परफार्मेंस वाली सूची में इसलिए टॉप टेन में शामिल है.

शिकायतों का क्या रहा हाल? यहां देखिए डाटा

  • 1 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 तक कुल शिकायतें- 3 लाख 97 हजार
  • संतुष्टि के साथ बंद की गई शिकायतें- 2 लाख 4206
  • स्पेशल क्लोज- 730
  • नॉट कनेक्टेड और बंद करने की 30 शिकायतें
  • कार्यक्षेत्र से बाहर 3782 शिकायतें
  • आंशिक बंद 3900 शिकायतें
  • लंबित 179439 शिकायतें

अफसर के साथ कर्मचारियों का भी परफॉर्मेंस खराब

सीएम हेल्पलाइन डैशबोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के सभी जिले सी और डी कैटेगरी में है. करीब 22 जिले ऐसे हैं. जिनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट डी कैटेगरी के आधार पर हैं, जबकि तीन ऐसे जिले हैं. जिनकी रिपोर्ट डी आई है. जिसमें खरगोन, शिवपुरी आगर मालवा शामिल है. इससे स्पष्ट है कि अफसर के पास पहुंचने वाली शिकायतों के साथ नीचे वाले कर्मचारियों का भी रवैया जिम्मेदारी पूर्वक नहीं है. जिसकी वजह से एल 1 से लेकर एल 4 तक शिकायत घूमती रहती हैं और निराकरण के लिए आप में शिकायतकर्ता आस लगाकर बैठा रहता है.

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TNA DESK

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