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दुर्ग में साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, 11 आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों के लेनदेन का खुलासा

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दुर्ग : जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। मोहन नगर और सुपेला थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने म्यूल खातों के जरिए चल रहे संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क की परतें खोल दी हैं।

250 से अधिक खातों से करोड़ों का अवैध लेनदेन उजागर
जांच में सामने आया है कि 250 से ज्यादा संदिग्ध बैंक खातों के माध्यम से करीब 1 करोड़ 88 लाख 67 हजार 554 रुपये का साइबर फ्रॉड लेनदेन किया गया। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने और उसे छिपाने के लिए किया जा रहा था।

सरकारी पोर्टल से मिली जानकारी ने खोला पूरा खेल
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा के अनुसार भारत सरकार के समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट के आधार पर कर्नाटक बैंक और फेडरल बैंक की विभिन्न शाखाओं में संचालित खातों की गहन जांच की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कई खाताधारक अपने बैंक खातों को साइबर ठगी के पैसे लेने के लिए उपलब्ध कराकर अवैध कमाई कर रहे थे।

पहले भी हो चुकी हैं बड़ी गिरफ्तारियां, नेटवर्क की गहराई उजागर
पुलिस के मुताबिक साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही ऐसे मामलों में 150 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह आंकड़ा इस गिरोह की व्यापकता और संगठित तरीके से चल रहे साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाता है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

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पुलिस की अपील, सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराना भी गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

क्या होता है म्यूल अकाउंट, जानिए इसका पूरा अर्थ
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध धन को प्राप्त करने, छिपाने या ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। यह खाते अक्सर किसी आम व्यक्ति के नाम पर होते हैं, जिन्हें लालच देकर कमीशन का झांसा दिया जाता है या धोखे से इस्तेमाल किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य असली अपराधियों को कानून की पकड़ से दूर रखना होता है।

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