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बोल की लब आजाद है तेरे….. आचार संहिता हटा , कर्मचारी लेंगे राहत की सांस, रख सकेंगे खुलकर अपना विचार…. होंगे विकास कार्य

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भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 16 मार्च को लोकसभा चुनाव की घोषणा की गई और इसके साथ ही पूरे देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी जिसके साथ ही विकास कार्य पूर्ण रूप से ठप हो गए थे तो वही शासकीय कर्मचारियों को राजनीतिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देने पर पाबंदी लग गई थी जो आज आचार संहिता हटते ही समाप्त हो गई है अब कम से कम शासकीय कर्मचारी राहत की सांस लेंगे और अपने विचार व्यक्त कर सकेंगे दरअसल आदर्श आचार संहिता के फेर में सबसे अधिक शासकीय कर्मचारी ही फंसते हैं एक तरफ जहां उन्हें निर्वाचन कार्य निष्पक्ष होकर संपन्न करना होता है वही उन्हें किसी भी प्रत्याशी या पार्टी के पक्ष में अपने विचार व्यक्त करने की भी आजादी नहीं होती है और ऐसा करने पर तत्काल प्रभाव से कर्मचारी को निलंबित कर दिया जाता है यही वजह है कि लोकतंत्र के पर्व का जहां पूरे देशवासी मजा लेते हैं वही शासकीय कर्मचारियों के लिए एक प्रकार से यह सजा हो जाता है जहां उन्हें हर पल इस बात का ध्यान रखना होता है कि वह आदर्श आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रहे हैं क्योंकि कार्रवाई की तलवार हमेशा उन पर लटकी रहती है । इधर आदर्श आचार संहिता लागू होते ही ट्रांसफर पोस्टिंग पर भी बैन लग जाता है और सारे विकास कार्य भी ठप हो जाते हैं अब इन सब पर से रोक हट गई है और कर्मचारियों सहित अधिकारियों ने भी अब राहत की सांस ली है ।

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